READING GITA

An old farmer lived on a farm in the mountains with his young grandson. Each morning, Grandpa was up early sitting at the kitchen table reading his Bhagavad Gita. His grandson wanted to be just like him and tried to imitate him in every way he could.

One day the grandson asked, “Grandpa! I try to read the Bhagavad Gita just like you but I don’t understand it, and what I do understand, I forget as soon as I close the book. What good does reading the Bhagavad Gita do?

The Grandfather quietly turned from putting coal in the stove and replied, “Take this coal basket down to the river and bring me back a basket of water.

The boy did as he was told, but all the water leaked out before he got back to the house. Continue reading

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ANTIM AATH DIN

पिछले वर्ष मराठी भाषा में “अखेरचे आठ दिवस” अर्थात “अंतिम आठ दिन” नामक एक कहानी पढ़ी | भारत के महाराष्ट्र प्रदेश में संत एकनाथ नामक एक तपस्वी महात्मा हुए हैं | यह कथा उन्हीकी जीवनी से ली गयी है | आज हम उसी कथा का हिंदी भाषांतर प्रस्तुत कर रहे हैं |

अंतिम आठ दिन

एक बार संत एकनाथजी को एक गृहस्थने दो प्रश्न पूछे | पहला प्रश्न उसने स्वयं के भविष्य के बारेमें पूछा अरु दूसरा एकनाथजी के सहज ही शांत स्वाभाव के बारे में | एकनाथजी सदा हर परिस्थिति में शांत कैसे रहते हैं, इसका भेद जानना चाहते थे |

एकनाथजी ने हंसकर कहा “फिर कभी बताऊँगा” |

कुछ दिनों बाद एकनाथजी उस गृहस्थ से फिर मिले और कहा – “तुम्हारे पहले प्रश्न का उत्तर देने का समय आ गया है, कारण, दुर्भाग्य से आठ दिन बाद तुम्हारी मृत्यु होगी” | इतना कहकर एकनाथजी वहां से चले गए | Continue reading